सचिव महोदय का संदेश

यह विभाग अपनी स्थापना की शुरूआत से ही देश भर में जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए क्षमता निर्माण में सुधार करके एक सक्षम वातावरण प्रदान कर रहा है। विभाग द्वारा परिवर्तनीय अनुसंधान पर अधिक बल देते हुए अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। नवाचार अनुसंधान को बढ़ावा देने, लोगों को सशक्त बनाने, विश्व स्तर के बुनियादी ढांचे के निर्माण, सार्वजनिक-निजी भागीदारी का समर्थन करने की अपनी विभिन्‍न पहलों के माध्यम से विभाग ने इस दिशा में एक ओर जहां भारतीय कृषि, स्वास्थ्य, उद्योग और पर्यावरण को व्‍यापक रूप से प्रभावित किया है, वहीं दूसरी ओर जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत वैश्विक स्तर पर पंहुच गया है।

विभाग 2015 में घोषित अपनी राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी विकास रणनीति के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी उत्‍पादों के सृजन, कृषि, खाद्य और पोषण सुरक्षा, किफायती स्‍वास्‍थ्‍य और स्वास्थ्य देखभाल; पर्यावरण संबंधी सुरक्षा; स्वच्छ ऊर्जा, जैव ईंधन आदि क्षेत्रों में उत्पादकता और लागत-प्रभावशीलता के लिए प्रक्रियाओं और प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर प्रमुख जोर देता है।

राज्य सरकारों के साथ घनिष्‍ट समन्वयन से कौशल विकास कार्यक्रम विकसित किए गए हैं। सरकार द्वारा घोषित नीतियों ने नवाचार को सशक्त बनाने और विकास को बनाए रखने तथा सततता को सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत किया है। प्रौद्योगिकी संचालित अनुसंधान पर जोर देने का लक्ष्‍य समाज को बड़े पैमाने पर प्रभावित करने वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं का किफायती समाधान प्रदान करके लाखों लोगों के जीवन और जीविका को बेहतर बनाना है।

सरकार, शिक्षा, उद्योग, स्टार्टअप और सिविल सोसाइटी के बीच इस प्रकार मिलकर कार्य करने से इनके संबंधों में व्‍यापक स्‍तर पर बदलाव हुए है। विभाग ने माननीय प्रधान मंत्री द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय मिशन कार्यक्रमों जैसे स्‍वस्‍थ भारत, स्वच्छ भारत, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया के अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से योगदान के विशेष प्रयास किए हैं। विभाग ने अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम-बीआईआरएसी के माध्यम से देश में नवाचारों के लिए एक जीवंत वातावरण तैयार किया है।

हमारा निरंतर प्रयास सभी हितधारकों के साथ जुड़ना है क्योंकि हम भारत को 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर वाली जैव अर्थव्‍यवस्‍था बनाने की ओर बढ़ रहे हैं।