भारत-यूएस जीनोम अभियांत्रिकी/संपादन

भारत-अमेरिका जीनोम अभियांत्रिकी/सम्पादन संस्थान (जीईटीआईएन) विदेशी अध्येतावृत्ति

विभाग ने यह अध्येतावृत्ति कार्यक्रम भारतीय संस्थानों और प्रमुख अमेरिकी विश्वविद्यालयों के बीच सहयोगी अनुसंधान परियोजनाओं को संचालित करने के लिए शुरू किया, जो जीनोम अभियांत्रिकी / संपादन प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में छात्रों और युवा संकायों के लिए है। कार्यक्रम का प्रबंधन इंडो-यू.एस. विज्ञान और प्रौद्योगिकी फोरम (आईयूएसएसटीएफ़) द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय छात्रों और वैज्ञानिकों को अग्रणी अमेरिकी संस्थानों में विश्व स्तरीय अनुसंधान सुविधाओं से परिचित कराने और उन तक पहुंच प्रदान करने का अवसर प्रदान करना है, जीनोम अभियांत्रिकी / संपादन प्रौद्योगिकी के अग्रणी क्षेत्र में क्षमता निर्माण और दीर्घकालिक अनुसंधान एवं विकास संपर्कों और अमेरिकी संस्थानों / शोधकर्ताओं के साथ सहयोग का निर्माण करना है। । वर्तमान में जैव प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में पूर्णकालिक आधार पर पीएचडी में कार्यरत भारतीय छात्र 6 महीने के लिए छात्र इंटर्नशिप के पात्र हैं। जीवन विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी में पीएचडी धारक भारतीय नागरिक जो भारत में सार्वजनिक वित्त पोषित अनुसंधान एवं विकास लैब / विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान / मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों / कॉलेजों में नियमित आधार पर कार्यरत व्यक्ति 5 सप्ताह से 12 महीनों के लिए विदेशी अध्येतावृत्ति के पात्र हैं। वर्तमान में अमेरिका में काम कर रहे यू.एस. संकाय या विदेशी पोस्ट डॉक्स (कम से कम दो साल से) जो जीनोम अभियांत्रिकी / संपादन प्रौद्योगिकी क्षेत्र से संबद्ध हैं, वे भारतीय लैब में सहयोगी अनुसंधान करने के लिए 2 से 3 महीने की अवधि के लिए विजिटिंग अध्येतावृत्ति के पात्र हैं। विभाग के पास प्रत्येक श्रेणी में 5 व्यक्तियों को सहायता प्रदान करने का प्रावधान है। वर्ष 2017-18 के दौरान, 5 भारतीय छात्रों और 5 वैज्ञानिकों ने अध्येतावृत्ति को सफलतापूर्वक पूरा किया है और वर्तमान वर्ष के दौरान 5 छात्र इंटर्नशिप, 5 विदेशी अध्येतावृत्ति और 3 विजिटिंग अध्येतावृत्ति प्रदान की गई हैं ।